किसानों के लिए बकरी पालन (Goat Farming) एक वरदान साबित हो रहा है| बकरी पालन से अच्छा खासा मुनाफा भी मिल रहा है| बकरी पालन (Goat Farming) से बहुत से किसानों की अच्छी आमदनी दिन भर दिन बढ़ती जा रही है| बकरी पालन (Goat Farming) नए तकनीक से करने की आवश्यकता है| इसके साथ ही साथ सरकार नए नए प्रकार की योजना भी ला रही है और इसका किसान भाइयों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले यह सरकार की कोशिश है|

किसान भाइयों को यह समझना होगा बकरी पालन (Goat Farming) में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कैसे निकालना है| बकरी पालन (Goat Farming) की सारी जानकारी हासिल करने के बाद ही शुरू करें| बकरी पालन (Goat Farming) दो प्रकार से की जाती है| पहला है (small Scale) कम बकरी के साथ बकरी पालन करके बड़े तो पर लेकर जाना दूसरा है एक ही इसमें ज्यादा बकरियों से शुरू करना| छोटे किसान भाई ज्यादा तोर से कम बकरियों के साथ बकरी पालन (Goat Farming) शुरू कर सकते हैं|

अपने भारत देश में विविध प्रकार के बकरी की नस्ल पाए जाते हैं| उसमें उस्मानाबादी, गांवरानी, बारबारी, बीटल, जाखराना, जमुनापारी, बोर, मालाबारी, सिरोही,सुरती (Osmanabadi, Gavrani, Barbari, Beetal, Jakhrana, Jamnapari, Boer, Malabari, Sirohi, Surti) यह सारे नस्ल है|

हर एक राज्य में अलग-अलग प्रकार के बकरी की नस्ल पाले जाते हैं| जैसे कि कहीं जगह बारिश ज्यादा होती है| कई जगह बारिश कम होती है| कई राज्य में धूप ज्यादा होती है| कई जगह में ठंड कम ज्यादा होती है| इस वजह से हर एक राज्यों के हवामान की प्रकृति के हिसाब से जो बकरी को हवामान अनुकूल होता है उस हिसाब से यह नस्ल की बकरियां पाली जाती है| अच्छे से हवामान बकरियों के लिए उचित होने से रोग आने की संभावना कम होती है| इस वजह से जिस राज्य में बकरी पालन करना चाहते हो उस राज्य के हवामान के अनुसार जो बकरी पाली जाती है उसे ही प्राध्यान ज्यादा से ज्यादा दे|

बकरियों की प्रकृति अच्छी रहने के लिए और रोग कम आने के लिए ज्यादा तोरसे लाल मिट्टी का उपयोग होना चाहिए| लाल मिट्टी में जीवाणु तैयार नहीं होते| उस वजह से रोग आने की संभावना कम रहती है| बकरिया ज्यादा तोरसे से सुखी जगह में बसना पसंद करती है|

उस्मानाबादी बकरी (Osmanabadi Goat):- महाराष्ट्र , तेलंगाना , कर्नाटक मे उस्मानाबादी बकरीया पाले जाते हैं। शरीर की रचना (Body Shape) :- शरीर बड़ा और लंबे पैर होते हैं। 1 साल में तीन बच्चे को जन्म देती है। वजन (Weight) :- 36 से 40 किलो वजन होता है। यह बकरी को मीट के लिए भी यूज किया जाता है । यह बकरी 3.5 लीटर दूध हर रोज देती है|

गांवरानी बकरी (Gavrani Goat) :- गावरानी बकरिया ज्यादा तोरसे महाराष्ट्र में पाले जाते हैं। बकरियों के लिए हवामान अनुकूल होता है| उस वजह से ज्यादा बकरिया बीमारीओ का सामना नहीं करना पड़ता है। गांवरानी बकरी ज्यादा बीमारी से संक्रमित नहीं होती है । इस वजह से गावरान बकरिया ज्यादा पाले जाते हैं। शरीर रचना (Body Shape) :- शरीर बड़ा वजनदार और कान छोटे रहते हैं। वजन (Weight) :- 35 से 40 किलो होता है। इसका मीट के लिए भी उपयोग होता है |

बारबारी बकरी (Barbari Goat):- उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा बारबारी बकरिया पालते हैं। शरीर रचना (Body Shape):- मोड सिंग, छोटे कान, धब्बेदार स्कीन होती है। वजन (Weight):- 30 से 35 किलो वजन होता है।

बीटल बकरी (Beetal Goat) :- ज्यादातर पंजाब और हरियाणा में बीटल बकरी या पाली जाती है। शरीर रचना (Body Shape):- बड़ा शरीर, लंबा पेर, लंबे कान होते है। दूध :- 2.5 लीटर तक रोजाना दूध देती है। वजन (Weight):- 35 से 40 किलो तक का वजन बीटल बकरियों का होता है।

जखराना बकरी (Jakhrana Goat):-ज्यादातर राजस्थान और हरियाणा में ही पाले जाते हैं। शरीर रचना (Body Shape):-जनरल यह जात बीटल बकरी की तरह होती है। सिर लंबा होता है बॉडी साइज मोटी होती है कान मोटे होते हैं इसका वजन 30 से 35 किलो होता है। दूध :- 3 लीटर दूध देती है।

जमुनापारी बकरी (Jamnapari Goat):- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु में इस नस्ल को पाला जाता है। शरीर रचना (Body Shape):-कान लंबे होते हैं। शरीर का वजन भी ज्यादा होता है। 120 से 130 किलो वजन 1 बकरी का होता है। दूध :- 3.50 से 4 लीटर दूध हर रोज देती है। साल में एक ही बार बच्चा देती है।